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Top of 2013: एक पोर्न स्टार को भारत लाने का खामियाजा

Posted On: 22 Dec, 2013 social issues में

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Top most incidents on social level


सामाजिक स्तर पर इस साल कई बड़े फैसलों का स्वागत किया गया, कई ऐसी घटनाएं हुई जिन्होंने देश और समाज को हिलाकर रख दिया. इस ब्लॉग में हम आपको इस साल हुई उन्हीं महत्वपूर्ण घटनाओं से परिचित करवाएंगे जिन्होंने इस साल यानि 2013 में समाज को सबसे ज्यादा प्रभावित किया.


बलात्कार एक सरप्राइज सेक्स: साल के शुरुआत में ही कनाडा से भारत आई पोर्न स्टार सनी लियोन ने अपने गुल खिलाने शुरु कर दिए थे. एक पोर्न स्टार को बॉलिवुड में नेम-फेम दिलाने का खामियाजा हमारे समाज को तब भुगतना पड़ा जब पिछले वर्ष हुए निर्भया सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद सनी लियोन ने अपने एक ट्वीट में बलात्कार जैसे बेहद अमानवीय और जघन्य अपराध को सरप्राइज सेक्स बताया था. दिल्ली में हुई बलात्कार की उस घटना के बाद जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था, जिसने इंसान का इंसान पर से विश्वास उठा दिया था, भारतीय मूल की कनाडियाई पोर्न स्टार का कहना था कि रेप पर इतना हल्ला मचाने की क्या जरूरत है, यह तो बस सरप्राइज सेक्स की तरह है. सनी लियोन के इस छोटे से ट्वीट ने उन सभी भावनाओं को ठोकर मार दी जो गैंग रेप की बेहद नृशंस और अमानवीय घटना के बाद भारत के हर नागरिक के जहन में जागी थीं.



Top of 2013: साइंस के कमाल ने दुनिया को चौंकाया



बच्चों को यौन शोषण से बचाने की पहल: विकृत मानसिकता के लोगों ने छोटे-छोटे और मासूम बच्चों पर अपनी हवस उतारनी शुरू कर दी है. वह मनचाहे तरीके से उनका शोषण करते हैं लेकिन बच्चे बेचारे जो अपने साथ हो रही उन ‘गंदी’ हरकतों को समझ भी नहीं पाते वह उनका विरोध करने की बजाय चुपचाप अपने किसी परिचित या करीबी के इस व्यवहार को सहन किए जाते हैं. ऐसे हालातों से निपटने के लिए स्पेन में विशेष तौर पर बच्चों के लिए ऐसे होर्डिंग्स लगाए गए हैं जिसके भीतर का संदेश और तस्वीरें सिर्फ बच्चों को ही नजर आएंगी. वहीं अगर कोई वयस्क उन होर्डिंग्स को देखेगा तो उन्हें कुछ अलग ही दिखाई देगा. इस होर्डिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि वे लोग जो बाल यौन अपराध में संलिप्त रहते हैं उन्हें इन होर्डिंग्स में ऐसा कुछ नजर नहीं आएगा जिससे कि वो सावधान हो जाएं.



सहमति से सेक्स करने की उम्र में कमी: 2012 में गैंगरेप की घटना के बाद जस्टिस वर्मा समिति का गठन किया गया था और इस समिति की सिफारिशों पर गौर करने के बाद भारत सरकार ने स्वेच्छा से बनाए गए शारीरिक संबंधों की उम्र को 18 से घटाकर 16 करने पर विचार कर एक पहल स्वरूप इससे संबंधित एक ड्राफ्ट भी तैयार कर लिया गया था. लेकिन विरोध प्रदर्शन और सहमति ना बनने के बाद अभी यह ड्राफ्ट कानून का रूप नहीं ले पाया.



Top of 2013 – बीते साल इन्होंने किया मुंह काला



सुप्रीम कोर्ट द्वारा पीड़िता को मुआवजा दिलवाने की पहल: भारत की लचर न्या व्यवस्था को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हर स्तर की अदालतों को यह निर्देश दिया है कि वह पीड़ित को मुआवजा देने पर विचार करें और अपने विवेकाधिकार का प्रयोग कर वह धनराशि के रूप में पीड़ित को उचित मुआवजा प्रदान करें, ताकि अपराध का शिकार बनने और उसके प्रति अपराध साबित होने के बाद उसे यह ना लगे कि उसे नजरअंदाज किया जा रहा है.



आरुषि हत्याकांड पर फैसला: एक लंबे समय से जिस फैसले का इंतजार था आखिर वो फैसला आ ही गया और शायद ऐसा पहली बार हुआ है जब पहले से लगाए जा रहे कयास सच साबित होने पर माहौल निराशा से भर गया है कि कैसे कोई बाप अपनी इकलौती बेटी को मौत के घाट उतार सकता है. बहुचर्चित आरुषि-हेमराज मर्डर केस पर आए सीबीआई के फैसले में आरुषि के माता-पिता, नुपुर और राजेश तलवार को इस हत्याकांड का जिम्मेदार ठहराया गया है.



Top of 2013: गूगल पर रहा इन अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का बोलबाला



भूख से बिलख रहा है भारत: ग्लोबल हंगर इंडेक्स भुखमरी को मांपने वाला अंतरराष्ट्रीय स्तर का सूचकांक है जिसके अनुसार भुखमरी के मामले में भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे पिछड़े देशों से भी आगे निकल गया है. यह सूचकांक 2011-2013 के सर्वेक्षण पर आधारित है जिससे संबंधित भुखमरी की रिपोर्ट में भारत को 63वें स्थान पर रखा गया है, जबकि श्रीलंका को 43वां, पाकिस्तान और बांग्लादेश को 57वें और 58वें स्थान पर रखा गया है. वहीं इस सूची में चीन को छठा स्थान मिला है. रिपोर्ट के अनुसार एक कड़वा सच यह भी है कि भले ही आज हम तरक्की कर रहे हों लेकिन भारत के हालात अपने पड़ोसी मुल्कों से कहीं ज्यादा बदतर हैं.



Top of 2013 – तकनीक की दुनिया में क्या कुछ रहा खास



गे एक्टिविटी अपराध है: हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकों के बीच स्थापित होने वाले किसी भी प्रकार के शारीरिक संबंधों को अवैध बताकर उन्हें अपराध के दायरे में ला खड़ा किया है. आपको बता दें कि 3 जुलाई,  2009 को समलैंगिक संबंधों पर दिए गए अपने फैसले में हाइकोर्ट का कहना था कि संविधान की धारा 377 के उस प्रावधान में,  जिसमें समलैंगिकों के बीच सेक्स को अपराध करार दिया गया है, से मूलभूत मानवाधिकारों का हनन होता है. हाइकोर्ट के इस निर्णय का तीखा विरोध करते हुए कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने समलैंगिक अधिकारों जैसे फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और अब सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय स्पष्ट कर दिया है जिसके अनुसार संविधान की धारा 377 के अंतर्गत किसी भी महिला या पुरुष के साथ बनाए जाने वाले अप्राकृतिक यौन संबंध या फिर किसी जानवर के साथ स्थापित शारीरिक संबंध अपराध के दायरे में आएंगे और दोषी व्यक्ति को कम से कम 10 वर्ष और अधिकतम उम्रकैद तक की सजा हो सकती है.


मर्दवादी समाज नहीं समझ पाएगा बलात्कार का दंश

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